
छत्तीसगढ़ की आत्मा पर खतरा
भूपेश बघेल ने ।घेरा सरकार को
*♦रायगढ़/* छत्तीसगढ़ की पहचान बन चुके एशिया के सबसे बड़े भिलाई स्टील प्लांट को बेचने की तैयारी चल रही है ? प्लांट को देखने गौतम अडानी जल्द ही छत्तीसगढ़ आने वाले हैं इसको लेकर अटकल बाजियों का दौर शुरू हो गया है राजनीति भी गर्म हो गई है कांग्रस को आशंका है कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी भिलाई स्टील प्लांट को अडानी समूह को सौंपने वाले हैं प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने इसको लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की नजर अब छत्तीसगढ़ के महत्वपूर्ण सार्वजनिक उपक्रम भिलाई स्टील प्लांट पर है।उन्होंने देश की सार्वजनिक संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने की मुहिम से जोड़ते हुए कहा कि छत्तीसगढ़िया उनके इन मंसूबों को कभी पुरा नहीं होने देंगे भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट पर तीखी आपत्ति जताई है उन्होंने लिखा कि जानकारी मिली है कि अडानी समूह भिलाई स्टील प्लांट को देखने आने वाला है। इसके बाद उन्होंने सवाल उठाया कि अडानी के बीएसपी पहुंचने का क्या मतलब है,? यह समझा जा सकता है। बघेल ने आरोप लगाया कि देश की संपत्तियों को बेचने का अभियान चल रहा है और अब प्रधानमंत्री की नजर भिलाई स्टील प्लांट पर है।
भूपेश बघेल की पोस्ट
बीएसपी बिकाऊ नहीं
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने पोस्ट में अदाणी समूह को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रिय खरीदार बताते हुए भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री यह समझ लें कि बीएसपी छत्तीसगढ़ की आत्मा है और प्रदेश के लोग इसे किसी भी सूरत में बिकने नहीं देंगे। उन्होंने छत्तीसगढ़ भाजपा के नेताओं को भी संदेश देते हुए कहा कि वे समझ लें कि बीएसपी बिकाऊ नहीं है।
बीएसपी गरमाई राजनीति
भिलाई स्टील प्लांट केवल एक औद्योगिक इकाई नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की औद्योगिक पहचान है। भिलाई स्टील प्लांट की स्थापना के बाद के ही भिलाई शहर के विकास, रोजगार और प्रदेश की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाई है। हजारों कर्मचारियों और उनके परिवारों की आजीविका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस प्लांट से जुड़ी रही है।भिलाई स्टील प्लांट सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) की प्रमुख इकाइयों में शामिल है। यहां रेल पटरियों सहित विभिन्न प्रकार के इस्पात उत्पादों का निर्माण करती है। देश के बुनियादी ढांचे, रेलवे और औद्योगिक विकास में भी संयंत्र का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ऐसे में बीएसपी को लेकर किसी भी संभावित निजी भागीदारी, प्रबंधन में बदलाव या निजीकरण की आशंका राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा बन गया है। संयंत्र से जुड़े कर्मचारियों, श्रमिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों के लिए रोजगार की सुरक्षा, औद्योगिक विकास और सार्वजनिक क्षेत्र में इसकी भूमिका प्रमुख चिंता के विषय हैं। भूपेश बघेल का यह बयान भिलाई स्टील प्लांट के लिए खतरे की घंटी है केंद्र की सार्वजनिक उपक्रमों से जुड़ी नीतियों पर कांग्रेस के विरोध के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
अडानी के दौरे पर प्रशासन खामोश
दूसरी ओर, अदाणी समूह के संभावित दौरे और उसके उद्देश्य को लेकर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं है। किसी औद्योगिक इकाई का दौरा अपने आप में उसके अधिग्रहण या निजीकरण का प्रमाण नहीं माना जा सकता इसलिए इस मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित पक्षों की आधिकारिक जानकारी व निर्णयों को देखना महत्वपूर्ण होगा।
🔴रमेश पत्रकार 94252 52176



