आस्था व विश्वास का अनूठा संगम
*♦रायगढ़/* नवरात्रि के पावन पर्व पर मां दुर्गा को प्रसन्न करने व उनकी कृपा पाने के लिए भक्त विभिन्न प्रकार के अनुष्ठान और परंपराओं का पालन करते हैं। छत्तीसगढ़ के संस्कारधानी कहे जाने वाले रायगढ़ में आस्था और भक्ति के कई अनूठे रूप देखने को मिलते हैं। यहाँ के प्रसिद्ध बूढ़ी माई के दरबार में मन्नत पूरी होने पर दंडवत होकर (कर नापने) और झूमते हुए माता के दरबार में हाजिरी लगाने की परंपरा सदियों पुरानी है। इसी कड़ी में अब शहर के कैलाश नगर (संजय मैदान) स्थित दुर्गा पंडाल के पास एक और अनोखी परंपरा चर्चा का विषय बनी हुई है, जहाँ मन्नत पूरी होने पर भक्त जमीन पर लेटते हैं और खुले बाल के साथ महिलाएं उनके ऊपर से चल कर जाती है यह दृश्य लोगों को अचंभित करने वाला है। कैलाश नगर संजय मैदान के इस दुर्गा पंडाल में पिछले चार सालों से एक विशेष प्रथा निभाई जा रही है। इसके तहत मन्नत मांगने वाले श्रद्धालु जमीन पर लेट जाते हैं और खुले बाल वाली महिलाएं उनके ऊपर से गुजरती है इस संबंध में स्थानीय लोगों का मानना है कि उनमें साक्षात मां जगदंबा का भाव आता है।मान्यता है कि जिन भक्तों के शरीर के ऊपर से ये महिलाएं गुजरती हैं, उनके सभी दुख-दर्द कष्ट समाप्त हो जाते हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस प्रथा का हालांकि कोई वैज्ञानिक प्रमाण या आधार नहीं है, परंतु सनातन संस्कृति में आस्था और विश्वास की डोर बेहद मजबूत होती है।जब इस संबंध में एक महिला से जमीन पर लेटने का कारण पूछा गया, तो उसने बताया कि उसकी बेटी लंबे समय से बीमार रहती है। उसी के स्वास्थ्य लाभ और पूर्ण तंदुरुस्ती की मन्नत लेकर वह माँ के दरबार में आई है। ऐसे ही तमाम व्यक्तिगत कारणों व अटूट विश्वास के चलते श्रद्धालु इस तरह की प्रथाओं का पालन कर अपनी आस्था को पुख्ता करते हैं। बूढ़ी माई के दरबार में हर साल सैकड़ों फुट लंबी सड़क को नापते हुए और झूमते हुए पहुँचने वाले पचासों परिवारों की यह परंपरा सैकड़ों सालों से निर्बाध रूप से जारी है। वहीं, संजय मैदान की इस नई परंपरा को भी अब चार वर्ष पूरे हो चुके हैं।भक्तों का यह अटूट विश्वास इस बात का प्रमाण है कि माँ और भक्त का यह पवित्र संबंध सनातन धर्म की वह विशिष्टता है, जो युगों से चली आ रही है और आगे भी अनवरत जारी रहेगी।
*🔴रमेश पत्रकार 94252 52176*




