
संपादक की कलम से
*♦छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के पुसौर के (जकेला गांव) में घटित प्रोफेसर कपूर चंद गुप्ता का अपहरण कांड सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि खौफनाक त्रासदी व एक किशोर के असाधारण साहस व सूझबूझ का जीवंत दस्तावेज है। महज कुछ रुपयों की खातिर 14 घंटे प्रोफेसर को अंधेरी कोठरी में बंधक बनाकर मौत का डर दिखाया गया। शातिर अपराधियों ने जिस निर्दयता से परिवार को खत्म करने की धमकी दी, उसने एक सीधे-सादे ग्रामीण परिवार के दिलो-दिमाग को बुरी तरह झक झोर कर रख दिया, लेकिन, इस गहरी भयावहता के बीच रोशनी बनकर उभरा 10वीं कक्षा में पढ़ने वाला 15 साल का बालक प्रणय—जिसकी तीक्ष्ण बुद्धि और तकनीकी निपुणता ने मौत के मुहाने पर खड़े पिता को नया जीवन दिया। प्रणय की इस सफलता से न केवल जकेला गांव और पूरे रायगढ़ जिले का नाम रोशन हुआ है, बल्कि कोलता समाज के लिए भी यह अत्यंत गौरव का विषय है कि उनके समाज के एक छोटे से बालक ने वह कर दिखाया, जो बड़े- बड़े समझदार और सक्षम शख्स भी संकट के समय नहीं कर पाते। जब अपहरणकर्ता चाकू की नोक पर प्रोफेसर साहब को ले जा चुके थे और घर में किसी अनहोनी की आशंका का सन्नाटा पसरा था, तब 15 वर्षीय प्रणय ने घबराने के बजाय अदम्य धैर्य एवं बुद्धिमत्ता का परिचय दिया ।
अपहरणकर्ताओं द्वारा पिता से कॉलेज निरीक्षण पर जाने का फोन कराने पर पिता के हापेंट में निरीक्षण करने जाने जैसी छोटी सी विसंगति को प्रणय के बालसुलभ दिमाग ने तुरंत भांप लिया। मां ने उसकी शंका खारिज कर दी, तब भी प्रणय रुका नहीं, उसने अपने स्मार्टफोन पर ‘फाइंड माय डिवाइस’ एप का इस्तेमाल कर पिता की पल-पल बदलती लोकेशन ट्रेस करना शुरू किया लगातार बदलती लोकेशन और किरीतमाल के सिग्नल से उसने समझ लिया कि पिता भारी खतरे में हैं। इसी सटीक डिजिटल लोकेशन के बल पर परिजनों को तुरंत सही जगह भेजा जा सका और प्रोफेसर साहब को सकुशल मुक्त कराया गया।
यह प्रणय की दूरदर्शी सोच व तकनीकी जागरूकता का ही परिणाम था, जिसके बिना पिता को यह नया जीवन मिलना असंभव था। यदि प्रणय ने उस निर्णायक क्षण में ठंडे दिमाग से काम न लिया होता, तो 14 घंटे का यह अपहरण किसी दिल दहला देने वाली अनहोनी में भी बदल सकता था। आज का समाज अक्सर शिकायत करता है कि नई पीढ़ी स्मार्ट फोन और इंटरनेट में अपना समय गंवा रही है,लेकिन प्रणय ने यह सिद्ध कर दिया कि अगर बच्चों को सही दिशा और तकनीकी जागरूकता मिले, तो यही स्मार्ट फोन किसी की जान बचाने का सबसे बड़ा जरिया भी बन सकता है। प्रणय की यह सूझबूझ केवल एक परिवार की राहत नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के लिए एक प्रेरणापुंज है। ”प्रणय के इस अद्वितीय साहस, सूझबूझ व तकनीकी कुशलता को रेखांकित करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा उनके नाम की अनुशंसा अविलंब ‘राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार’ के लिए केंद्र सरकार को भेजी जानी चाहिए।
” प्रणय को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाना न केवल उसके इस अदम्य साहस का उचित सम्मान होगा , बल्कि इससे देशभर के बच्चों में संकट के समय तकनीक के सही उपयोग और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता का विकास भी होगा, यह कहने या लिखने मात्र से होने वाला नहीं है इसके लिए जकेला ग्राम एवं कोलता समाज को आगे बढ़कर प्रयास करने होगे। प्रशासन एवं सरकार पर प्रणय को उसका सम्मान दिलाने दबाव बनाना होगा वरना यह सब जानते है कि “मूकबधिर” सिस्टम आसानी से कुछ करने वाला नहीं है इसका प्रत्यक्ष प्रमाण रायगढ़ के अमर शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी को दिया जाने वाला गैलेंट्री अवॉर्ड (वीरता सम्मान) है, जो आज तक उन्हें नहीं दिया गया इसी तरह प्रणय के हक व अधिकार पर भी नौकरशाही डाका डाल सकती है ओर उसे कागजी खानापूर्ति में उलझा सकती है इसलिए समाज को अपने वीर सपूतों के हक के लिए मुखर और तत्पर रहना होगा, वरना इन्हीं उपेक्षाओं के कारण उत्कल एक बार अभिशप्त हो चुका है।
यदि विप्लव त्रिपाठी एवं प्रणय जैसे नायकों की इसी तरह अनदेखी जारी रही तो उपेक्षा का यह दंश भी किसी अभिशाप से कम नहीं होगा। इतिहास और संस्कृति गवाह है कि जो समाज अपने वीरों, बलिदानियों और नायकों का सम्मान नहीं करता, उन के हक व अधिकार के लिए खड़ा नहीं होता उसका पतन निश्चित है। इस अपहरण कांड को सुलझाने व अपराधियों को दबोचने में रायगढ़ पुलिस ने जो तत्परता दिखाई उसके लिए एस एस पी शशि मोहन सिंह एवं पुसौर टी आई हर्षवर्धन सिंह बैस की जितनी तारीफ की जाए कम है।अपहरण का खौफनाक मंजर भले ही समाप्त हो गया हो किन्तु पीड़ित परिवार को इस मानसिक आघात से उबरने में वक्त लगेगा फिर भी, इस पूरी त्रासदी के बीच 15 साल के प्रणय का ‘तकनीकी शौर्य’ इतिहास के पन्नों में एक मिसाल बनकर दर्ज हो गया है। अब समय है कि शासन -प्रशासन इस बाल-नायक को उसका हक दिलाए और ‘राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार’ से नवाज कर एक नई प्रेरणा की शुरुआत करे।
🔴संपादक रमेश पत्रकार 9425252176,7000654928




