
रायगढ़ पुलिस की बड़ी सफलता गांव का बाइक मिस्त्री निकला मास्टर माइंड 4 अपहरणकर्ता पकड़ाये
*♦रायगढ़/* छत्तीसगढ़ की रायगढ़ पुलिस ने सनसनीखेज प्रोफेसर अपहरण कांड का पूरा खुलासा कर दिया है। अपहरण करने वाले में प्रोफेसर के गांव जकेला का एक बाइक मिस्त्री भी है,जिससे प्रोफेसर हमेशा अपनी मोटर साइकिल बनवाया करते थे।पूरी घटना का यही मास्टर माइंड था ।उसी ने अपहरण की साजिश की पटकथा तैयार की थी,पुलिस ने मामले में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया है और ऑनलाइन ट्रांसफर की गई फिरौती की लगभग एक लाख रुपए की रकम को भी रिक्व्हर कर लिया है।
महज 48 घंटे में पुसौर पुलिस ने सभी आरोपियों को पकड़ कर अपहरण की गुत्थी को सुलझा लिया, एस एस पी शशि मोहन सिंह के दिशा-निर्देशन एवं ए एस पी अनिल सोनी के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी निरीक्षक हर्षवर्धन सिंह बैस के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने पहले आरोपी सुनील सारथी निवासी छातामुड़ा को घटना के 24 घंटे के भीतर ही पकड़ लिया था।
इसके बाद लगातार दबिश, पूछताछ और घेराबंदी के जरिए मामले की साजिश का खुलासा करते हुए मुख्य आरोपी राजेंद्र कुमार महंत उर्फ प्रदीप महंत, उसके छोटे भाई नरेंद्र उर्फ नंदू महंत तथा ग्राम औरदा निवासी दिनेश सारथी को भी गिरफ्तार कर लिया, उनके कब्जे एवं निशानदेही पर कुल ₹99,100 नकद, घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल, चाकू और मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इस तरह पुलिस ने घटना के 48 घंटे के भीतर अपहरण और लूट की पूरी वारदात का पर्दाफाश किया।
ऐसे खुला भेद पकड़ेगए आरोपी
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल अलग-अलग टीमों के माध्यम से आरोपियों की तलाश शुरू की। त्वरित कार्रवाई करते हुए सुनील सारथी को सारंगढ़ क्षेत्र से पकड़ा गया। पूछताछ में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने अपहरण की योजना बनाने के आरोप में राजेंद्र कुमार महंत उर्फ प्रदीप महंत, उसके भाई नरेंद्र उर्फ नंदू महंत तथा दिनेश सारथी की तलाश तेज की। थाना प्रभारी हर्षवर्धन सिंह बैस के नेतृत्व में पुलिस टीम ने लगातार दबिश और घेराबंदी कर तीनों को अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उन्होंने प्रोफेसर को नौकरीपेशा और सीधे-सादे व्यक्ति के रूप में देखकर उनके परिवार से आसानी से रकम ऐंठने की मंशा से वारदात की योजना बनाई थी। पुलिस ने आरोपियों को घटनास्थल पर ले जाकर घटनाक्रम का रिक्रिएशन भी कराया।

तीन दिन पहले बनी थी योजना
आरोपियों ने बताया कि सुनील सारथी के छातमुडा स्थित मकान में तीन दिन पहले 3 अक्टूबर को सब मिले ओर वही अपहरण की योजना बनाई थी, उन्हें लगा कि प्रोफेसर का परिवार सीधा साधा हे ओर आसानी से रकम ऐठी जा सकती है इसके बाद 5 अक्टूबर की शाम तीनों आरोपी दिनेश सारथी के भाई की काले रंग की हीरो सीडी डीलक्स मोटरसाइकिल से ग्राम जकेला स्थित राइस मिल के पास पहुंचे। वहां उन्होंने प्रोफेसर कपूर चंद गुप्ता को सड़क किनारे अकेले बैठकर मोबाइल देखते हुए पाया। आरोपियों ने अपनी योजना के अनुसार अलग-अलग रास्तों से प्रोफेसर के पास पहुंचकर उन्हें घेर लिया, और धक्का देकर गिराने के बाद पकड़ लिया। इसके बाद उन्हें डबरी के पीछे सुनसान स्थान पर ले जाकर चाकू की नोक पर अपहरण किया।
आरोपियों का है आपराधिक रिकॉर्ड
पकड़े गए दो आरोपी काफी खतरनाक बताए जाते हैं वे मर्डर केस में भी जेल जा चुके हैं। इनमें से एक का तो मर्डर केस का पुस्तैनी इतिहास रहा है बेटे से लेकर बाप तक कई अपराधों में संलग्न रहे है जिसमें एक युवती के किडनेपिंग का मामला भी शामिल है ऐसे आदतन अपराधियों के जाल में फंसे प्रोफेसर की जान उसके 15 साल के बेटे ने समय रहते बचा ली यदि उसने सूझबूझ का परिचय देते हुए पिता के मोबाइल नंबर की ट्रेकिंग कर लोकेशन ट्रेस नहीं की होती तो क्या होता इसकी कल्पना करने से ही रूह कांप उठती है ।
5 अक्टूबर की शाम 6से 7 बजे के बीच हुए अपहरण के बाद प्रोफेसर 6 अक्टूबर की सुबह 8 बजे के लगभग अपहरणकर्ताओं के कब्जे से मुक्त कराए गए थे, ये 14 घंटे का समय किस डर भय व आतंक के बीच गुजरा होगा, और बंधक बने प्रोफेसर के दिल पर क्या बीती होगी वो कैसे उसने यह समय गुजरा होगा उसको सोचने मात्र से दिल दहला उठता है। जिसने इस त्रासदी को भोगा हे उसकी तो मानसिक व शारीरिक स्थिति का अंदाज भी नहीं लगाया जा सकता 6 अक्टूबर को जब शाम को प्रफेसर कपूर चंद से पुसौर थाने में मुलाकात हुई तब भी वे सहमे हुए अपहरण कर्ताओं की परिवार को खत्म करने की धमकी ने उन्हें अंदर तक हिला कर रख दिया था।

इसी माईल स्टोन पर प्रोफेसर कपूर चंद गुप्ता बैठे थे
स्पीड न्यूज़ से बात चीत के दौरानी भी वे घटना का विवरण ठीक से नहीं दे पा रहे थे बार बार विचलित एवं चिंतित नजर आ रहे थे जेहन में सिर्फ एक ही बात थी कि बेटे ने उनकी जान बचाकर नया जीवन दिया है वे बार बार इसका उल्लेख कर भावुक हो उठते थे और बेटे पर गर्व होने की बात कहने लगते पत्नी के दिलासा एवं ढाढ़स बढ़वाने के बाद भी सहज एवं सामान्य नहीं हो पा रहे थे ।
अपहरण की इस विडंबना ने उनके सीधे साधे सरल ग्रामीण परिवेश के जीवन पर अंदर तक आघात किया था। जिससे उबरने में उन्हें कई साल लग सकते हैं, ऐसे कई केस पत्रकारिता के दौरान हमने देखे हैं जिसे याद कर विक्टिम आज भी सहम उठते है । बहरहाल पुलिस ने चारों आरोपी को पकड़ लिया हे,जो अपहृता के लिए चैन व सकून की बात है कम से कम आगे परिवार को होने वाली क्षति के डर से तो परिजनों को राहत मिलेगी।
बेटे के कमाल से बची पिता की जान
इस अपहरण कांड का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट विक्टिम का 15 साल का बेटा प्रणय था, जो दशवी में पढ़ता है उसके बाल सुलभ दिमाग ने दो बार पाइंट आउट किया कि उसके पिता किसी खतरे में हे पहली बार डिग्री कॉलेज के प्राचार्य के साथ पुसौर कॉलेज के निरीक्षण में जाने वाली बात में उसके दिमाग ने तुरंत क्लिक किया कि हाफ पेंट पहनकर कॉलेज कैसे जायेंगे, मां से उसने कहा भी लेकिन प्रोफेसर कभी झूठ नहीं बोलते कह कर मां ने उसकी बात को खारिज कर दिया।
किन्तु प्रणय की शंका खत्म नहीं हुई ओर उसने फाइंड एप पर पिता के मोबाइल नंबर से ट्रैकिंग शुरू कर दी पता चला कि उसके पिता का लोकेशन बार बार बदल रहा था, वह तय नहीं कर पाया कि उसके पिता वास्तव में कहा है। लेकिन दूसरे दिन सुबह आए फोन ओर पिता के सरायपाली की बात से प्रणय को पूरा विश्वास हो गया कि पिता के साथ कुछ तो हुआ है। क्योंकि एप में मोबाइल का लोकेशन किरीत माल बता रहा था तुरंत उसने अपने रिश्तेदारों को पूरी बात बताई ओर उन्होंने मौके पर जा कर प्रोफेसर को अपहरणकर्ताओं से मुक्त करा लिया, प्रणय के इस कारनामे के लिए प्रशासन को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए उसका नाम सरकार को भेजना चाहिए। ताकि दूसरों को उससे प्रेरणा मिले और उनमें टेक्निक के प्रति एवर्नेश पैदा हो।

SSP शशि मोहन की नसीहत
प्रणय का यह बल सुलभ प्रयास खतरनाक भी साबित हो सकता था, लोकेशन ट्रेस करने तक तो ठीक था लेकिन उसके बाद परिजनों का पुलिस की मदद के बिना मौके पर जाना ओर प्रोफेसर को अपहरण कर्ताओं के चंगुल से छोड़ने का प्रयास करना किसी भी गंभीर घटना को अंजाम दे सकता था। जैसा कि प्रणय एवं अपहृता कपूर चंद ने बताया कि अपहरणकर्ता हथियार बंद थे ऐसे में वे अपने बचाव में ग्रामीणों पर हमला कर सकते थे, या फिर प्रोफेसर्स को नुकसान भी पहुंचा सकते थे, यह तो गिनीमत रही कि ऐसा कुछ हुआ नहीं ओर पूरा मामला किसी नाटकीय बदलाव के बिना शांति से निपट गया।
एस एस पी शशि मोहन सिंह ने लोगो से अपील की है कि किसी आपराधिक मामले ने पुलिस की सहायता के बिना खुद से मामले से निपटने का प्रयास न करे यह घातक साबित हो सकता है पुलिस इस तरह के मामले को हैंडिल करने में ट्रेंड होती है ओर सक्षम होती है वो किसी भी स्थिति से निपटना जानती है इसलिए सीधे तौर पर उलझने से बचे।
इनकी रही महत्वपूर्ण भूमिका
इस मामले का खुलासा करने और आरोपियों की गिरफ्तारी में थाना प्रभारी निरीक्षक हर्षवर्धन सिंह बैस, उप निरीक्षक कुंदन लाल गौर, प्रशिक्षु उप निरीक्षक रिकेन्द्र चंद्राकर, प्रधान आरक्षक चंद्रहास नायक, आरक्षक धनुर्जय चंद बेहरा, महेश चौहान, ठंडाराम गुप्ता, तारिक अनवर, महिला आरक्षक किशोरी चौहान तथा कंप्यूटर ऑपरेटर कैलाश गुप्ता की सराहनीय भूमिका रही।




