♦️लीपापोती कर मामले को रफा♦️
♦️दफा करने किए जा रहे प्रयास♦️
🔵रायगढ़/ छत्तीसगढ़ के खरसिया नगर पालिका प्रांगण में विजया दशमी के पावन पर्व पर लगा ‘मीना बाजार’ मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि मौत का फंदा साबित हुआ है। यहाँ कल मंगलवार शाम को आकाश झूले से गिरकर 39 वर्षीय एक मजदूर-पेशे हलवाई की दर्दनाक मौत हो गई, जिसने झूला संचालकों की आपराधिक लापरवाही व स्थानीय प्रशासन के भ्रष्ट चरित्र को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। मृतक की पहचान खरसिया के पठान पारा निवासी नकुल निषाद (पिता रामप्रसाद निषाद) के रूप में हुई है, जो अपने परिवार के साथ मेला देखने गया था, किंतु जिंदा वापस घर नहीं लौट सका प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, नकुल जब आकाश झूले की ऊंचाई पर था, तो अचानक झटके के साथ वह नीचे आ गिरा। सिर और शरीर पर गंभीर चोटें लगने से उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। अब पुलिस और झूला संचालक अपनी खाल बचाने के लिए घटिया हथकंडे अपना रहे हैं। पुलिस का यह दावा कि “युवक नशे में था और झूले पर नाच रहा था” सीधे तौर पर प्रशासनिक असंवेदनशीलता और लीपा पोती का घटिया प्रयास है यदि पुलिस की थ्योरी को ही सही मान लिया जाए तो सबसे बड़ा सवाल यह हैं कि यदि वह युवक शराब के नशे में था, तो टिकट काउंटर के गार्ड और झूला संचालकों ने उसे झूले पर बैठने की इजाजत क्यों दी? क्या पैसे कमाने की हवस में इंसानी जिंदगी की कोई कीमत नहीं है? क्या इसके लिए झूला व मीना बाजार संचालक के खिलाफ लापरवाही एवं गैर इरादतन हत्या का मामला नहीं बनता ? क्यों इन पर कार्यवाही करने से पुलिस बचना चाहती है यदि उसकी नजर में युवक का शराब पीना जुर्म हे तो उसे शराब के नशे में झूले पर बैठने देना भी अपराध है सवाल तो यह भी है कि बिना किसी पुख्ता तकनीकी सुरक्षा, फिटनेस सर्टिफिकेट और मानकों के मौत के ये झूले किसके संरक्षण में हवा में लटकाए जाते हैं ? जबकि इन झूलो के कारण पहले भी हादसे होते रहे हैं।यह कोई पहली घटना नहीं है। रायगढ़ और खरसिया अंचल में लगने वाले मीना बाजारों की दास्तान हमेशा से लूट खसोट व भ्रष्टाचार की रही है। प्रशासन की आँखों के सामने नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जाती हैं, क्योंकि इस अवैध धंधे में ऊपर से नीचे तक सबकी हिस्सेदारी सेट है। क्या प्रशासन भूल गया है कि पिछले साल रायगढ़ में मीना बाजार के दौरान 60 फीट ऊपर हवा में झूला अचानक खुल गया था? तब पाँच से अधिक लोग घंटों हवा में अधर में लटके रहे थे और बाद में क्रेन की मदद से उनकी जान बचाई गई थी। तब कौन सी कार्रवाई हुई थी? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है ? रायगढ़ में लगने वाले इन मीना बाजारों का स्थानीय रहवासियों द्वारा हमेशा पुरजोर विरोध किया जाता रहा है। यहां तक की हाईकोर्ट में याचिका तक लगाई गई। आयोजन पर रोक लगने के बावजूद भ्रष्ट अधिकारियों ने ‘बैक डेट’ में परमिशन दे कर अदालत के आदेश को भी मजाक बना दिया था।जिले में लगने वाले सभी मीना बाजार पूरी तरह से नियम-विरुद्ध और गैर-कानूनी हैं जिसे नियम कायदे ताक पर रख कर परमिशन दिया जाता है इसके एवज में आयोजक अधिकारियों की भरपूर सेवा करते हैं ओर अधिकारी सारी विसंगतियों की अनदेखी कर इन्हें ‘वैधता का चोला’ पहना देते हैं क्या कोई अधिकारी बिना किसी ‘निहित स्वार्थ’ के आउट ऑफ वे जाकर इन जान लेवा आयोजनों की फाइल पास करेगा ? इसके अलावा मीना बाजार अवैध उगाही व टैक्स चोरी का सबसे बड़ा अड्डा है। हर साल यहाँ से लाखों- करोड़ों का काला कारोबार होता है और जीएसटी चोरी के मामले सामने आते हैं। परंतु अधिकारी संचालकों को क्लीन चिट देने के लिए महज दो-चार लाख का जुर्माना या टैक्स पटवा कर पूरे मामले को रफा-दफा कर देते हैं। सवाल यह है कि मीना बाजार के संचालक जीएसटी विभाग या स्थानीय प्रशासन के फूफा या जीजा तो है नहीं जो मुफ़्त में उन पर इतनी मेहरबानी की जाती है? देखा जाए तो मीना बाजार प्रशासनिक भ्रष्टाचार का खुला अड्डा है जो हर साल बेखौफ चल रहा है। अधिकारियों की इस आपराधिक चुप्पी और खुली छूट ने साबित कर दिया है कि जनता की जिंदगी की उनकी नजर में कोई औकात नहीं है ? अब देखना यह है कि इस खौफनाक हादसे के बाद भी क्या सिर्फ खानापूर्ति की कार्रवाई होगी, या फिर इस जानलेवा सिंडिकेट और भ्रष्ट अधिकारियों की गर्दन तक कानून के हाथ पहुँचेंगे ? सवाल गंभीर है, और जनता जवाब माँग रही है!
🔴रमेश पत्रकार 94252 52176🔴




