आस्था, आतिथ्य एवं ऐतिहासिक सफलता ने तोड़ दिए सभी रिकॉर्ड एक से बढ़कर एक आयोजनों से मोहित हुआ रायगढ़ का अग्र समाज
*♦रायगढ़/* इस बार रायगढ़ में महाराजा अग्रसेन की 5150वीं जयंती का आयोजन महज़ एक उत्सव नहीं, बल्कि भव्यता और ऐतिहासिक उपलब्धियों का एक ऐसा महाकुंभ बन गया, जिसने शहरवासियों को अचंभित कर दिया। 14 दिनों तक चले इस विशाल आयोजन में जो कुछ हुआ, उसने अतीत के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए और शहर के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय लिख दिया। इस भव्य जयंती समारोह की सबसे बड़ी ताकत इसका विशाल पैमाना था। कुल 70 से अधिक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें 7,200 से अधिक प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। इस महाआयोजन को सफल बनाने के लिए 700 से अधिक कार्यकर्ताओं ने दिन-रात एक कर दिया खास बात यह रही कि ये सभी प्रतियोगिता 6 अलग-अलग स्थानों पर, अलग-अलग शिफ्टों में बेहद अनुशासित तरीके से संचालित हुईं, जिससे हर आयु वर्ग के प्रतिभागी को अपनी कला दिखाने का पूरा मौका मिला।
अद्भुत फायर एवं इंडिया गाट टेलेंट शो
अद्भुत फायर शो इंडिया गाट टेलेंट शो ,लेजर लाइट शो एवं स्केटिंग रंगोली महाराष्ट्र की लेडीज धमाल ओर गोरिला डांस जैसे भव्य व आकर्षक कार्यक्रमों ने रायगढ़ की अग्रसेन जयंती को अविश्वसनीय एवं अकल्पनीय बना दिया इस बार की जयंती ने वो मुकाम हासिल किया जो अब तक कभी हासिल नहीं हुआ था जयंती के हर एक आयोजन ने लोगो को मात्र मुग्ध कर दिया स्केटिंग रंगोली के कलाकारों ने चौक चौराहों पर नृत्य करते हुए शानदार रंगोली बनाई ओर आग लगाकर उसे बेहद आकर्षक बनाया नृत्य करते कलाकारों ने रंगोली के बीच में फायर स्टिक के साथ जो नृत्य प्रस्तुत किया वो देखने लायक था आधे घंटे तक चले अनवरत फायर शो की रंग बिरंगी आतिशबाजी ने पूरे माहौल को अचंभित कर दिया ओर इंडिया गाट टेलेंट शो में भगवान शंकर की डमरू लीला एवं रजनी कांत शो ने लोगो को फेविकोल से
सीट से जैसे चिपका ही दिया था महराज अग्रसेन के जीवन पर लेजर लाइट शो से सर्व समाज पहली बार अग्र पुरुष के जीवन से अवगत हुआ।
लजीज व्यंजनों की भरमार
आयोजन स्थल पर आने वाले मेहमानों और प्रतिभागियों के लिए सुबह से लेकर रात तक भोजन, अल्पाहार और चाय-पानी की अभूतपूर्व व्यवस्था की गई थी। खान- पान की गुणवत्ता को खास बनाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे चाय प्रेमियों के लिए कोलकाता से विशेष ‘कुल्हड़ चायवाला’ बुलाया गया था जिसने भी यह चाय पी तारीफ किए बिना नहीं रह सकामलाई ब्रेड चाप का स्वाद परोसने के लिए भी कोलकाता से विशेष कारीगर आए थे। बेल और बिही (बेल-बेर) के शरबत जैसे पारंपरिक और विशेष स्वास्थ्यवर्धक आइटम्स के लिए राजस्थान से कारीगरों को बुलाया गया था। अग्रसेन जयंती के इतिहास में इतने वृहद स्तर पर आतिथ्य सत्कार पहले कभी नहीं देखा गया था। इस आयोजन का सबसे प्रेरणादायक पहलू रायगढ़ के ‘सर्व समाज’ की सहभागिता रही समापन समारोह में शहर के हर वर्ग और समाज के लोगों ने बढ़- चढ़ कर हिस्सा लिया कार्यक्रम में अद्भुत फायर शो, इंडिया गॉट टैलेंट के कलाकारों के शानदार प्रदर्शन, स्केटिंग रंगोली और महाराजा अग्रसेन के जीवन पर आधारित भव्य लेजर लाइट शो ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।अंत में सभी ने महाभोज में शामिल होकर प्रसाद ग्रहण किया।
गोल्डन बुक की दहलीज पर रायगढ़
इस जयंती का सबसे भावनात्मक और ऐतिहासिक क्षण वह था, जब 34 बुजुर्ग दंपतियों की सामूहिक रूप से पचासवीं गोल्डन जुबली का सेलिब्रेशन ने तो परिवार एवं उपस्थित लोगों के दिल को छू लिया ऐसा अद्भुत नजारा बाप की शादी ने बेटे बेटी दमाद बहु नाती पोते का डांस देख कर मन गदगद हो गया यह अपने आप में अनोखा और दुर्लभ रिकॉर्ड है। यदि आयोजक इस उपलब्धि को ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में दर्ज कराते हैं, तो यह रायगढ़ के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गर्व का विषय बन जाएगा। साथ ही, इन सभी दंपतियों व आयोजकों के नाम हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में अमर हो जाएंगे।इस बार की अग्रसेन जयंती ने साबित कर दिया कि जब निष्ठा, विजन और जनसहयोग एक साथ मिलते हैं, तो आयोजन इतिहास बन जातहैं इतने सफल आयोजन के शिल्पियों की चर्चा के बिना अविस्मरणीय जयंती अधूरी रह जाएगी इसलिए उन विशेष आयोजकों का उल्लेख जरूरी है जिनके बिना इतना बड़ा आयोजन सफल नहीं हो सकता था।
इनके बिना शानदार जयंती संभव नहीं थी
इस बार की जयंती ने एक नया सितारा उभरा जिसने दिखा दिया कि यदि दिल में चाहत हो तो कुछ भी किया जा सकता है शिल्पियों ने पहला नाम अनूप बसंल का है। जो 20 साल से अग्रसेन जयंती के केवल दर्शक थे लेकिन इस बार जिम्मेदारी का बोझ उनके ही कंधे पर था जिसे उन्होंने बखूबी ओर शानदार तरीके से निभाया दूसरा बड़ा नाम प्रदीप गर्ग का है । जिसका दबदबा पूरी जयंती पर छाया था 700 कार्यकर्ताओं का संचालन करना उनसे काम लेना ओर कराना हर किसी के बस की बात नहीं होती लेकिन प्रदीप गर्ग वे शख्स दे जिनका हर कार्यकर्ता सम्मान करता था ओर अनुशासित तरीके से उनके निर्देशों का पालन करता था तीसरे नाम से आप परिचित हैं मुकेश क्लानोरिया जिनके बिना अग्रसेन जयंती की परिकल्पना ही नहीं की जा सकती हर किसी को साथ लेना ओर जी जान से आयोजन को सफल बनाना यदि किसी को सीखना हे तो वो मुकेश क्लानोरिया का शागिर्द बन जाए उसके बाद अपने आप सब हो जाएगा और किसी को पता भी नहीं चलेगा महिला विंग में आशा टाइटन कविता बेरीवाल एवं शालू गोयल का शानदार काम और योगदान ने पुए आयोजक में चार चांद लगा दिए थे अब में उस शख्स से मिलवा रहा हूं जिसकी वाक पट्टूता ने सब को मोह लिया संजय कार्ड जिसने पूरी जयंती का मंच संचालन अपनी पूरी ऊर्जा झोंक दी ओर किसी को अहसास तक नहीं हुआ कि पूरा कार्यक्रम किस खूबी से शानदार तरीके से संपन्न हो गया।
*🔴रमेश पत्रकार 94252 52176*




