
Modi Cabinet Reshuffle: बीजेपी ने नितिन नबीन की नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया है और अब सियासी नजरें सीधे मोदी कैबिनेट पर टिक गई हैं. पार्टी संगठन में बड़े बदलाव के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या अगला नंबर केंद्र सरकार का है? मौजूदा समय में केंद्रीय मंत्रिपरिषद में 69 सदस्य हैं, जबकि संवैधानिक सीमा 81 की है. यानी सरकार के पास 12 और मंत्रियों को शामिल करने की गुंजाइश है. यही आंकड़ा कैबिनेट फेरबदल की चर्चा को हवा दे रहा है. हालांकि, अभी किसी बड़े फेरबदल की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.
नई बीजेपी टीम में पीयूष गोयल, स्मृति ईरानी और अनुराग ठाकुर जैसे बड़े चेहरों को संगठन में अहम जिम्मेदारी मिली है. वहीं केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष और पंकज चौधरी को यूपी बीजेपी अध्यक्ष बनाया गया है. ऐसे में ‘वन पर्सन, वन पोस्ट’ का फॉर्मूला भी चर्चा में है. अगर संगठन और सरकार के बीच जिम्मेदारियों का बंटवारा होता है, तो कुछ मंत्रियों की भूमिका बदल सकती है. यही वजह है कि संभावित कैबिनेट फेरबदल को 2029 की तैयारी से भी जोड़कर देखा जा रहा है.
संगठन के बाद सरकार में बदलाव की चर्चा क्यों?
- बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम में कई ऐसे चेहरे हैं, जो पहले से केंद्र सरकार या राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. पीयूष गोयल को पार्टी का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया है. हर्ष मल्होत्रा और पंकज चौधरी को क्रमशः दिल्ली और उत्तर प्रदेश संगठन की जिम्मेदारी मिली है. इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या इन नेताओं को अब सरकार की जिम्मेदारी से मुक्त किया जाएगा.
- मौजूदा कैबिनेट में कुछ वरिष्ठ मंत्री एक से ज्यादा मंत्रालय संभाल रहे हैं. ऐसे में फेरबदल केवल नए चेहरों को शामिल करने तक सीमित नहीं रह सकता. मंत्रालयों का पुनर्वितरण भी हो सकता है. रिपोर्टों के मुताबिक संभावित बदलाव में चुनावी जरूरत, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, उम्र, प्रदर्शन और संगठन की नई जिम्मेदारियों को ध्यान में रखा जा सकता है.
पीयूष गोयल की भूमिका पर सबसे ज्यादा नजर
पीयूष गोयल का नाम संभावित बदलाव के केंद्र में है. वह फिलहाल वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री हैं और उन्हें बीजेपी का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया है. पार्टी के ‘वन पर्सन, वन पोस्ट’ सिद्धांत के चलते यह सवाल उठ रहा है कि क्या वह सरकार की जिम्मेदारी जारी रखेंगे या संगठन में पूरी तरह सक्रिय होंगे. अगर बदलाव होता है तो वाणिज्य मंत्रालय किसी दूसरे चेहरे को मिल सकता है.
हर्ष मल्होत्रा और पंकज चौधरी भी चर्चा में
हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली बीजेपी की कमान दी गई है. वह केंद्र में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग और कॉरपोरेट मामलों के राज्य मंत्री हैं. दिल्ली संगठन की जिम्मेदारी के साथ मंत्रालय संभालना कितना व्यावहारिक होगा, इस पर चर्चा है. वहीं पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष बनाया गया है. यूपी के अगले विधानसभा चुनाव को देखते हुए उनकी भूमिका बेहद अहम है. हालांकि, उनकी सामाजिक और राजनीतिक उपयोगिता को देखते हुए पार्टी उन्हें मंत्रिपरिषद में बनाए भी रख सकती है.
12 पदों की गुंजाइश, नए चेहरों की एंट्री संभव
संवैधानिक सीमा के हिसाब से मोदी सरकार में 12 और मंत्री शामिल किए जा सकते हैं. उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने पर विचार की चर्चा है. सहयोगी दलों को भी इसमें जगह मिल सकती है. महाराष्ट्र से श्रीकांत शिंदे का नाम चर्चा में है. उनकी एंट्री बीजेपी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के रिश्तों को और मजबूत करने का राजनीतिक संकेत दे सकती है.
सिर्फ नए मंत्री नहीं, मंत्रालयों का बंटवारा भी
12 खाली पदों का मतलब यह जरूरी नहीं कि 12 नए मंत्रियों को ही शामिल किया जाए. सरकार में कुछ मंत्रियों के पास एक से अधिक विभाग हैं. फेरबदल के दौरान इन अतिरिक्त जिम्मेदारियों को दूसरे नेताओं में बांटा जा सकता है. इससे सरकार में विशेषज्ञता और क्षेत्रीय संतुलन दोनों साधने की कोशिश हो सकती है. पंजाब से भी नए राजनीतिक समीकरणों के आधार पर किसी चेहरे को मौका मिलने की अटकलें हैं.
संसदीय बोर्ड में योगी-फडणवीस पर नजर
कैबिनेट के अलावा बीजेपी के संसदीय बोर्ड में संभावित बदलाव की भी चर्चा है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नाम पर अटकलें हैं. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा का नाम भी बीजेपी की अगली पीढ़ी के नेतृत्व के संदर्भ में सामने आता रहा है. अगर इन नेताओं को शीर्ष निर्णय लेने वाली संस्था में जगह मिलती है, तो पार्टी के भीतर नई पीढ़ी की भूमिका और मजबूत हो सकती है.
2029 की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा पूरा खेल
बीजेपी संगठन में बदलाव और संभावित कैबिनेट फेरबदल को अलग-अलग घटनाओं के बजाय एक बड़ी राजनीतिक रणनीति के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है. पार्टी अगले विधानसभा चुनावों के साथ 2029 लोकसभा चुनाव की तैयारी भी कर रही है. ऐसे में सरकार और संगठन में जिम्मेदारियों का नया संतुलन बनाया जा सकता है. फिलहाल कैबिनेट फेरबदल पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी है, लेकिन नितिन नबीन की टीम के बाद मोदी सरकार में संभावित बदलाव की चर्चा ने दिल्ली की राजनीति का तापमान जरूर बढ़ा दिया है.




