रायगढ़ में डंडे से पीट कर की हत्या
रायपुर में युवक को गोदा चाकू से
🔵 रायगढ़/ छत्तीसगढ़ में नाबालिगों के बीच बढ़ता आपराधिक ग्राफ और हिंसक प्रवृत्ति अब समाज के लिए एक गंभीर और चिंताजनक नासूर बन गया है। पिछले कुछ दिनों के भीतर राज्य में हुई दो अलग-अलग वीभत्स वारदातों ने यह साबित कर दिया है कि मामूली विवादों में भी बच्चों के द्वारा हत्या जैसे जघन्य अपराध को अंजाम देना अब कोई बड़ी बात नहीं रह गई । ताजा मामला रायगढ़ जिले का है, जहां चक्रधरनगर के भिखारी माल में एक नाबालिग ने मामूली कहासुनी के बाद 43 साल के कन्हैया महार की हत्या कर दी। इसके पहले इसी तरह राजधानी रायपुर में भी तीन नाबालिग लड़कों ने एक 18 साल के युवक को चाकू से गोद डाला था इन खौफनाक घटनाओं से सभ्य समाज में डर को और बढ़ा दिया है, इन सिलसिलेवार वारदातों ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है।
रायगढ़ के बहुचर्चित मामले की शुरुआत तब हुई जब 25 अक्टूबर की रात्रि कन्हैया महार अपनी पत्नी और बच्चों के साथ संबलपुर (ओडिशा) से ट्रेन द्वारा अपने घर लौटे थे। घर के बाहर ऑटो का किराया चुकाने के लिए वे बाहर निकले, लेकिन काफी देर तक जब वे नहीं लौटे तो परिजनों को लगा कि वे आस पास टहलने गए होंगे। रात करीब डेढ़ बजे गांव के तीन युवक कन्हैया को अचेत अवस्था में उनके घर छोड़ कर गए। अगली सुबह परिजनों ने उन युवकों से पूछताछ की, तो परत-दर-परत खौफनाक सच सामने आया। पता चला कि देर रात कन्हैया का गांव के ही एक नाबालिग (विधि से संघर्षरत बालक) से किसी बात को लेकर विवाद हुआ था।
कब जागेगी सरकार व न्याय व्यवस्था ?
बात इतनी बढ़ गई कि गुस्से में अंधे होकर बालक ने बांस के डंडे से कन्हैया के सिर पर घातक प्रहार कर दिया। बीच- बचाव करने पहुंचे अन्य लोगों के साथ भी मारपीट की गई। गंभीर रूप से घायल कन्हैया को पहले रायगढ़ फिर रायपुर के डीकेएस अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उपचार के दौरान 3 नवंबर की रात उसने दम तोड़ दिया। मर्ग कायम होने के बाद चक्रधरनगर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पूर्व में दर्ज मारपीट के इस मामले को हत्या की गंभीर धारा 103(1) बीएनएस में विस्तारित कर नाबालिग को अभिरक्षा में लेकर घटना में प्रयुक्त बांस का डंडा जब्त कर लिया और उसे किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश कर बाल संप्रेक्षण गृह भेज दिया है। इस पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक राकेश मिश्रा और प्रशिक्षु उप निरीक्षक हर्ष चंद्राकर की अहम भूमिका रही।
इस घटना की आग ठंडी भी नहीं हुई थी कि राजधानी रायपुर से सामने आई एक अन्य वारदात ने कानून व्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 4 नवंबर को रायपुर में तीन नाबालिंग लड़कों ने 18 साल के सावन सेन पर चाकू से ताबड़ तोड़ हमला कर हत्या कर दी थी बताते हैं उनके बीच पुरानी रंजिश थी इस अचानक हुए खूनी हमले में लहूलुहान होकर युवक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी। राजधानी की इस घटना ने यह दिखा दिया कि शहरी और ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में किशोर उम्र के बच्चों के भीतर सहनशीलता तेजी से खत्म हो रही है और वे मामूली बातों पर खूनी हिंसा पर उतारू हो जाते हैं।
छत्तीसगढ़ में लगातार सामने आ रही इन वारदातों ने यह चेतावनी दे दी है कि यदि समय रहते बच्चों की काउंसलिंग, उनके बदलते व्यवहार और सोशल सर्कल पर अभिभावकों व प्रशासन ने पैनी नजर नहीं रखी, तो यह प्रवृत्ति आने वाले समय में और अधिक भयानक रूप ले सकती है। मासूम चेहरों के पीछे छिपी यह हिंसक होती मानसिकता हर नागरिक और कानूनविदों के लिए आज एक बड़ा विचारणीय प्रश्न बन गया है।
🔴रमेश पत्रकार 94252 52176🔴




